Sandhya Shantaram: हिंदी सिनेमा की लेजेंड, जिनकी कला और साहस ने बनाई पहचान

Sandhya Shantaram: हिंदी सिनेमा की लेजेंड
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Sandhya Shantaram – एक नाम, एक पहचान, ये भारतीय सिनेमा का ऐसा नाम है जिसने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग छाप छोड़ी। Sandhya Shantaram न सिर्फ अपने समय की बेहतरीन अभिनेत्री थीं, बल्कि उनके द्वारा कीये गए काम और उनकी साहसिकता आज भी याद की जाती है। 4 अक्टूबर 2025 को 93 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया, मगर उनकी कला, फ़िल्मों और जिंदगी के किस्से फिल्मों के दीवानों के दिलों में हमेशा बस रहेंगे क्यूंकी उनके चाहने वाले और उनके फिल्मी दुनिया के फैंस बहुत अधिक है ।

Sandhya Shantaram: बचपन से फ़िल्मों तक

Sandhya Shantaram का जन्म 22 सितंबर 1932 में हुआ था। मूल रूप से विजया देशमुख नाम से जानी जाने वाली Sandhya ने अपना करियर थिएटर आर्टिस्ट के तौर पर शुरू किया। मुंबई आने के बाद उन्हें V Shantaram की Amar Bhoopali (1951) में पहला बड़ा मौका मिला जिसे बेहतरीन तरीके से भुनाया और अपना नाम बनाया। Sandhya Shantaram की आवाज़ और अदाकारी के चलते वे V Shantaram की ज़्यादातर फ़िल्मों के लिए चुन ली जाती थीं। जिसकी वजह से उनका रास्ता फिल्मी दुनिया में और आसान होता चला गया ।

करियर की बुलंदियाँ और चुनौतियाँ

Sandhya Shantaram ने Jhanak Jhanak Payal BaajeDo Aankhen Barah HaathNavrang जैसी कालजयी फ़िल्मों में काम किया। अपने किरदार की डिमांड के मुताबिक उन्होंने क्लासिकल डांस की ट्रेनिंग ली। Jhanak Jhanak Payal Baaje में उनकी परफॉरमेंस के लिए उन्हें चार Filmfare Awards और National Award मिला।

Do Aankhen Barah Haath में उन्होंने Champa की भूमिका निभाई, एक ऐसी किरदार जिसने फिल्म के warden और कैदियों का मन मोह लिया। Navrang में उनकी एक्टिंग और Holi सॉन्ग “अरे जा रे हट नटखट” आज भी iconic है – Elephant के साथ उनका डांस सीन मुझे बतौर रिपोर्टर हमेशा याद रहेगा।

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Sandhya Shantaram: साहसिक फ़ैसले और व्यक्तिगत जीवन

जैसा की आपको हमने शुरुआत में बताया की Sandhya Shantaram का नाम अक्सर साहस और निडरता के लिए लिया जाता है। Stree (1961) में उन्होंने जंगल के दृश्यों के लिए असली शेरों के साथ शूटिंग की, बिना body double के। उनके पति और डायरेक्टर V Shantaram से उनके संबंध भी चर्चा में रहे – दोनों ने 1956 में शादी की, Sandhya उनकी तीसरी पत्नी बनीं थी। उनके बीच का सामंजस्य न सिर्फ व्यक्तिगत, बल्कि सृजनात्मक रूप में भी फिल्मों में झलकता था।

पुरस्कार और सम्मान

Sandhya Shantaram को Pinjara (Marathi) और Chandanachi Choli Ang Ang Jali के लिए Filmfare Awards मिला। 2009 में उन्होंने V Shantaram Awards के मौके पर भी शिरकत की थी, जिससे उनके लेजेंड्री स्टेटस को और भी मजबूती मिली।

Sandhya Shantaram की विरासत

अपने करियर के आखिरी सालों में Sandhya ने शांति से Rajkamal Studio में अपना वक्त बिताया। जो मुझे व्यक्तिगत रूप से हमेशा प्रभावित करता है – Sandhya ने स्टारडम के शोर से परे सादगी और कला की साधना को चुना। उनका अभिनय, डांस और फिल्मों के लिए डेडिकेशन आज भी प्रेरणा है।

हिंदी और मराठी सिनेमा में Sandhya Shantaram की जगह कोई नहीं ले सकता। उनकी फ़िल्मों के क्लासिक गीत आज भी लोग गुनगुनाते हैं, और उनकी एक्टिंग की मिसाल दी जाती है। Wikipedia पर Sandhya Shantaram के बारे में अधिक पढ़ सकते हैं – Sandhya Shantaram 

Sandhya  ने भारतीय सिनेमा को जो दिया, वह कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके जाने से एक सदी के कलाकार की दुनिया में कमी जरूर आई है, लेकिन उनकी विरासत हमेशा ज़िंदा रहेगी। उनके साहस और प्रेरणा भरे जीवन को हमेशा याद किया जाएगा ।