दुनिया भर की नजरें एक बार फिर moon पर टिकी हैं। NASA और ISRO अब मिलकर चांद के रहस्यों की नई परतें खोलने जा रहे हैं। हाल ही में दोनों अंतरिक्ष एजेंसियों ने साझा मिशन की योजना बनाई है, जो 2025 के अंत में लॉन्च होने की उम्मीद है। इस मिशन का लक्ष्य चांद के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) पर बर्फ, खनिज और संभावित जीवन-संबंधी तत्वों की खोज करना है। क्यूंकी भारत का यान चंद्रयान उसी दिशा में land हुआ था इसलिए भारत की भूमिका इसमें हम है ।
जैसा कि पहले Newstop ने रिपोर्ट किया था, भारत के चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के बाद से ही वैज्ञानिक समुदाय में moon को लेकर उत्साह और उम्मीदें कई गुना बढ़ गई हैं।
NASA-ISRO का नया संयुक्त प्रयास
NASA और ISRO का यह मिशन दोनों देशों के वैज्ञानिकों की साझा तकनीक और डेटा एनालिसिस पर आधारित होगा। जहां NASA उच्च-तकनीकी कैमरों और रडार सिस्टम से लैस उपकरण भेजेगा, वहीं ISRO का फोकस लैंडिंग और सर्वे मैपिंग पर रहेगा। क्यूंकी जैसा की हमने कहा की भारत का isro दक्षिणी ध्रुव की बेहद अच्छी जानकारी रखता है इसलिए ये साझा मिशन की पहल भारत के isro के साथ की जा रही है ।
सूत्रों के अनुसार, इस मिशन में विशेष रूप से “Lunar Water Mapping” तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसका मकसद moon की सतह पर मौजूद जमी हुई बर्फ की सटीक लोकेशन और मात्रा का पता लगाना है।
Moon की सतह पर क्या मिल सकता है?
चांद की सतह पर अब तक कई बार बर्फ और खनिज के संकेत मिले हैं, लेकिन उनकी वास्तविक स्थिति अभी तक साफ नहीं हो पाई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि दक्षिणी ध्रुव पर स्थायी छाया वाले गड्ढों Permanently Shadowed Craters में बर्फ मौजूद हो सकती है। लेकिन ये अभी तक सिर्फ एक अनुमान है इसका कोई भी प्रमाण विज्ञान के पास नहीं है ।
लेकिन अगर यह सच साबित हुआ, तो भविष्य में moon मानव बस्तियों (Lunar Colonies) के लिए सबसे बड़ी उम्मीद बन सकता है। पानी की उपलब्धता वहाँ न केवल पीने के लिए बल्कि हाइड्रोजन और ऑक्सीजन ईंधन के उत्पादन में भी मदद कर सकती है।
Moon की खोज में भारत की भूमिका
भारत ने पिछले कुछ सालों में moon मिशन के क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता को साबित किया है। चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता ने ISRO को दुनिया की अग्रणी अंतरिक्ष एजेंसियों की सूची में शामिल कर दिया।
अब ISRO इस नए मिशन में और भी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल करेगा, जिसमें autonomous navigation system, AI-based terrain mapping, और solar-powered lunar sensors शामिल होंगे।
ISRO के प्रमुख ने हाल ही में कहा कि :
“भारत अब सिर्फ एक दर्शक नहीं, बल्कि moon exploration का एक निर्णायक खिलाड़ी बन चुका है। आने वाले सालों में हम और गहराई तक इसकी सतह का अध्ययन करेंगे।”
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती दिलचस्पी
सिर्फ भारत और अमेरिका ही नहीं, बल्कि चीन, जापान और यूरोप भी आने वाले दो सालों में अपने-अपने moon missions की योजना बना रहे हैं। SpaceX जैसी निजी कंपनियां भी चांद पर कार्गो और इंसान भेजने की तैयारियों में जुटी हैं।
इससे यह साफ है कि आने वाले दशक में moon अंतरिक्ष विज्ञान और वैश्विक राजनीति दोनों का केंद्र बनने वाला है।
हमारी राय
जब भी moon की बात आती है, तो यह सिर्फ एक खगोलीय पिंड नहीं बल्कि इंसान की जिज्ञासा, उम्मीद और तकनीकी क्षमता का प्रतीक बन जाता है। भारत जैसे देश का इस मिशन में अग्रणी भूमिका निभाना हमारे वैज्ञानिक आत्मविश्वास का प्रमाण है।
अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो आने वाले कुछ वर्षों में इंसान का स्थायी ठिकाना पृथ्वी के बाद moon पर बनना अब सिर्फ सपना नहीं, बल्कि हकीकत बनने की ओर बढ़ रहा है।













