नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2025 | Newstop ब्यूरो : हिंदू धर्म में Dev Uthani Ekadashi एक खास पर्व है और यह सवाल हर साल भक्तों के मन में खास जगह रखता है की देव उठनी एकादशी कब है, लेकिन हमें ये भी जानना चाहिए की आखिर ये कौन सी पूजा है कौन सी एकादशी है हालांकि सभी लगभग जानते हैं लेकिन फिर भी कुछ लोग नहीं जानते yए वो खास दिन है जब भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं। इसलिए ये मनाया जाता है यह पर्व चातुर्मास के समापन और शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल 2025 में देवउठनी एकादशी 1 नवंबर 2025 (शनिवार) को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, और इसी दिन से विवाह, सगाई, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों का सिलसिला फिर से शुरू हो जाता है। और हिन्दू धर्म के कई शुभ कार्य इसके तुरंत बाद से शुरू हो जाते हैं जैसे शादी विवाह इत्यादि
देवउठनी एकादशी का शुभ मुहूर्त कब है?
अगर आप जानना चाहते हैं कि देव उठनी का सुबह मुहूर्त क्या है, तो पंचांग के अनुसार तिथि का आरंभ 1 नवंबर को सुबह 9:11 बजे होगा और तिथि का समापन 2 नवंबर को सुबह 7:31 बजे पर होगा। इसलिए उदय तिथि के अनुसार व्रत और पूजा 1 नवंबर को करना सर्वोत्तम और शुभ रहेगा। व्रत का पारण (समापन) 2 नवंबर को दोपहर 1:11 बजे से 3:23 बजे के बीच किया जाएगा।
देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह कब है?
कई जगहों पर इस दिन तुलसी विवाह भी बड़े धूम धाम से मनाया जाता है, क्यूंकी ये दिन भगवान विष्णु और तुलसी माता के दिव्य मिलन का भी प्रतीक है। इसलिए देव उठनी एकादशी के दिन ही तुलसी विवाह भी मनाया जाता है । तुलसी विवाह आमतौर पर देवउठनी एकादशी के अगले दिन यानी 2 नवंबर 2025 को आयोजित किया जाता है। लेकिन ये एक ही दिन के दो पर्व हैं इसलिए इन्हें हम एक साथ जोड़कर भी मान सकते हैं क्यूंकी ये विवाह भगवान विष्णु के जागरण के बाद देवताओं के आशीर्वाद से संपन्न होता है और इसे घर में मनाना बेहद शुभ माना जाता है।
देवउठनी एकादशी करने से क्या होता है?
शास्त्रों के अनुसार, Dev Uthani Ekadashi का व्रत करने से व्यक्ति को असीम पुण्य की प्राप्ति होती है। शस्त्रों में यह व्रत पापों का नाश करने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से और भगवान विष्णु की पूजा करने से चारों लोकों में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि जो भक्त इस दिन तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाते हैं, उनके घर में लक्ष्मी स्थायी रूप से निवास करती हैं।
देवउठनी एकादशी पूजन विधि
देवउठनी एकादशी के दिन घर में विशेष तैयारी की जाती है। सुबह के स्नान के बाद भक्त गन्ने का मंडप सजाते हैं और बीच में एक सुंदर चौक बनाया जाता है। चौक के केंद्र में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है। फिर भगवान को गन्ना, सिंघाड़ा, फल, तुलसी और मिठाई का भोग लगाया जाता है। शाम के समय घी का दीपक जलाकर पूरी रात दीपदान करने की परंपरा है।यह दीपक विष्णु जागरण का प्रतीक माना जाता है।
एकादशी के दिन न करें ये कार्य
हालांकि देवउठनी एकादशी एक शुभ पर्व है लेकिन इस दिन हमें कुछ कार्यों को नहीं करना चाहिए क्यूंकी कुछ कार्य इस दिन वर्जित माने जाते है वो कार्य कुछ इस प्रकार हैं ।
- इस दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये अशुभ माना जाता है।
- मांसाहार, प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से परहेज़ करें।
- तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ें, क्योंकि इस दिन तुलसी माता विश्राम करती हैं।
- व्रती लोगों को गोभी, गाजर, शलजम, पालक जैसे सागों का सेवन करना भी वर्जित माना जाता है।
जल झूलनी एकादशी 2025 और देवउठनी एकादशी का संबंध
कई लोग पूछते हैं कि जल झूलनी एकादशी 2025 कब है। यह एकादशी भाद्रपद महीने में आती है और इसे भगवान विष्णु के विश्राम में जाने का संकेत माना जाता है। वहीं Dev Uthani Ekadashi पर्व उस चक्र का समापन है, जब भगवान विष्णु वापस जागकर भक्तों का कल्याण करते हैं। इसलिए इस दिन के बाद किए जाने वाले कार्य शुभ माने जाते हैं ।














