नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2025 | Newstop ब्यूरो : भारत में अक्टूबर महीने को त्योहारों का महिना माना जाता है । दिवाली के बाद अब Bhai Dooj 2025 भी सिर्फ दो दिन बाद ही या रहा है इस बार का भाई दूज 23 अक्टूबर को या रहा है । यानि 23 अक्टूबर 2025 को गुरुवार के दिन इस पर्व को मनाया जाएगा लेकिन कुछ खास बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है क्यूंकी इस दिन में कुछ समय अशुभ है और इसका सही मुहूरत जान कर अगर इस त्योहार को मनाया जाए तो ये शुभ और भाई की लंबी उम्र के लिए बेहद कारगर साबित होगा ये त्योहार हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार है । भाई दूज को भी रक्षा बंधन की तरह ही भाई की सुरक्षा और प्रेम का पर्व माना जाता है ।
इस साल के भाई दूज में कुछ तिथियों के झोल की वजह से कई लोग कन्फ्यूज हैं कि भाई दूज कब है 2025 में । पंचांग के अनुसार अगर देखें तो द्वितीया तिथि का उदय 23 अक्टूबर की सुबह को होगा । इसलिए शास्त्रों के अनुसार भाई दूज इस बार 23 तारीख को ही मनाया जाएगा 21 तारीख को गोवर्धन पूजा के 1 दिन के अंतराल के बाद ये पर्व है ।
Bhai Dooj 2025 Date and Time सही तिथि और समय
इस बार कार्तिक शूकल पक्ष द्वितीय तिथि का प्रारंभ 22 अक्टूबर को रात 8:17 मिनट से होगा । और द्वितीय तिथि की समाप्ति 23 अक्टूबर रात 10:47 मिनट पर होगी उदय तिथि के अनुसार इस बार bhai dooj गुरुवार को मनाया जाएगा क्योंकि Bhai Dooj के लिए हिंदू धर्म में तिथि का निर्धारण सूर्योदय के आधार पर किया जाता है।
Bhai Dooj 2025 Shubh Muhurat (शुभ मुहूर्त)
शास्त्रों के अनुसार, भाई दूज की पूजा शुभ चौघड़िया या अमृत चौघड़िया में करना सर्वोत्तम और शुभ माना जाता है।
शुभ चौघड़िया: दोपहर 12:05 से 1:30 बजे तक
अमृत चौघड़िया: दोपहर 1:30 से 2:54 बजे तक
इस समय में बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर भोजन कराती हैं। ऐसा करने से भाई की आयु लंबी होती है और दोनों के रिश्ते में मिठास बनी रहती है। पंडितों का मानना है कि इस मुहूर्त में भाई दूज मनाने से भाई की अकाल मृत्यु का भय भी समाप्त होता है इसलिए हमें समय का खास ध्यान रखना चाहिए।
Govardhan Puja and Bhai Dooj 2025
इस बार गोवर्धन पूजा 21 अक्टूबर को और भाई दूज 23 अक्टूबर को मनाई जाएगी। आम तौर पर ये त्योहार दिवाली के तुरंत बाद एक के बाद एक आते हैं, लेकिन इस बार तिथि परिवर्तन के कारण इनके बीच एक दिन का अंतर रहेगा। गोवर्धन पूजा जहां भगवान श्रीकृष्ण की आराधना का दिन होता है, वहीं Bhai Dooj भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा की भावना को समर्पित है।
भाई दूज कैसे मनाया जाता है
भाई दूज के दिन बहनें सुबह स्नान के बाद घर की साफ-सफाई करती हैं और पूजा की तैयारी करती हैं। फिर वो अपने भाइयों को घर बुलाकर तिलक लगाती हैं, आरती करती हैं और मिठाई खिलाती हैं और भाई उन्हें मिठाई खिलाते हैं। बदले में भाई अपनी बहनों को उपहार और सुरक्षा का वचन देते हैं।
बहनें इस दिन यमुना स्नान या यमराज-यमुना की कथा का पाठ करती हैं। ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।कई जगहों पर भाई दूज को भ्रातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।
भाई दूज की कहानी (Bhai Dooj Ki Kahani)
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस पर्व की शुरुआत भगवान यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि एक दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए हुए थे। यमुना ने प्रेमपूर्वक उनका स्वागत किया, आरती उतारी और तिलक लगाकर उन्हें भोजन कराया।
तब यमराज ने प्रसन्न होकर कहा “जो भाई कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन अपनी बहन के घर भोजन करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।” तभी से हर साल यह पर्व भाई दूज के रूप में मनाया जाने लगा। इसलिए कई परिवार आज भी यमुना तट या जलाशय के पास पूजा करते हैं।
Bhai Dooj 2025 Significance महत्व
Bhai Dooj 2025 न केवल एक पारिवारिक पर्व है, बल्कि यह उस भावनात्मक बंधन का प्रतीक है जो भाई और बहन के बीच होता है। यह दिन केवल तिलक और उपहारों का नहीं, बल्कि विश्वास, स्नेह और सुरक्षा के रिश्ते को मजबूत करने का अवसर है। भारत के विभिन्न हिस्सों में इस दिन अलग-अलग परंपराएं हैं उत्तर भारत में तिलक का प्रचलन है, जबकि महाराष्ट्र में इसे भाऊ बीज कहा जाता है।














