Karva Chauth Ki Kahani : भारत में करवा चौथ के बहुत बड़ी धार्मिक मान्यता है इस दिन महिलायें अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए व्रत रखती है और पारंपरिक तरीके से व्रत का पूजन किया जाता है । सुहागिनों के लिए दिन बेहद खास रहता है और बड़े ही चाव से सुहागिने इस त्योहार का इंतजार भी करतीं हैं । लेकिन बहुत कम लोगों को ये पता है की आखिर इस त्योहार या फिर कहें की करवा चौथ व्रत की शुरुआत कैसे हुई । और इसके शुरू होने के पीछे क्या कारण था क्यूँ ये व्रत रखा जाता है ।
आपको Newstop पर भारतीय संस्कृति और त्योहारों से संबंधित जानकारी बिल्कुल समय पर और सटीक दी जाती है , आज हम करवा चौथ की असल कहानी के बारे में जानेंगे की आखिर क्यूँ ये व्रत किया जाता है और इसके पीछे की असली कहानी क्या है । ये सिर्फ कोई कहानी नहीं बल्कि मान्यताओं से जुड़ा हुआ एक हिन्दू धार्मिक त्योहार है ।
करवा चौथ से जुड़ी और असली कहानी क्या है?
करवा चौथ व्रत की शुरुआत तो काफी प्राचीन काल से हुई है उस समय में जब पति किसी युद्ध में भाग लेने या फिर व्यापार के लिए घर से दूर जाते थे तो पत्नी उनकी लंबी उम्र और सलामती के लिए निर्जला व्रत रखती थी । और उनकी लंबी उम्र और सफलता की कामना करती थी लेकिन इस व्रत की एक घटना इतिहास में ऐसी हुई जिसके बाद ये एक मान्यता और त्योहार के रूप में माना जाने लगा आईए जानते है उस कहानी के बारे में ।
विरावती से जुड़ी हुई एक बेहद भावनात्मक और धार्मिक कहानी ।
बहुत पुराने समय की बात है जब एक गाँव में एक साहूकार नाम का आदमी एक सेठ के रूप में हुआ करता था । उस सेठ के घर में सात बेटे और सिर्फ एक प्यारी सी बेटी थी जिसका नाम विरावती था । विरावती की शादी होने के बाद जब उसका पहला करवा चौथ आया तो वो अपने मायके आई थी । उसने अपनी माँ , भाभियों और अपनी सहेलियों के साथ व्रत रखा हुआ था । पूरा दिन भूखी प्यासी रही विरावती शाम होने तक काफी थकी और कमजोर सी हो चुकी थी । उसके भी उस से बेहद प्यार करते थे और उनसे विरावती की ये हालत देखि नहीं जा रही थी ।
इसलिए उन्होंने छल से उसे भोजन करने का प्लान बनाया । भाइयों ने मिलकर पीपल के पेड़ के पीछे दीपक जला कर विरावती को धोखे से चाँद बता कर भोजन करने के लिए उस से कहा । बहन देखों चाँद निकल गया है अब तुम व्रत खोल लो और भोजन कर लो । विरावती अपने भाइयों की बात मान कर व्रत खोलने गई और व्रत खोलते हुए उसने जैसे ही पहला निवाला मुह में डाला उसे छींक या गई जब दूसरा निवाला किया उसमें बाल मिला अब उसे ये समझ आने लग गया की कुछ तो गलत हुआ है ।
और जैसे ही विरावती ने तीसरा निवाला लिया उसे उसके पति की मृत्यु का संदेश मिल गया । संदेश मिलते ही विरावती जमीन पर गिर पड़ी और फुट फुट कर रोने लगी । बाद में उसे किसी तरह पता चला की उसके साथ धोखा करके उसके भाइयों ने उसका व्रत तुड़वाया है । उसके बाद विरावती संकल्प ले कर अपने पति के शव के साथ पूरा साल भर निर्जल पुर भूखी प्यासी तपस्या पर बैठ गई और अगले साल करवा चौथ तक व्रत करने का संकल्प कर लिया ।
उसकी इस भक्ति और श्रद्धा को देखकर माता पार्वती और गणेश जी प्रकट हुए और पुछा बेटी तुम क्या चाहती हो तो उसने अपने पति का जीवन मांगा तब माता पार्वती ने उसे आशीर्वाद दिया की तेरे पति का जीवन तुझे वापिस मिलेगा । और उसका पति जीवित हो गया उसके बाद से आज तक करवा चौथ की मान्यता चली या रही है ।
करवा चौथ के दिन पति-पत्नी क्या करते हैं?
करवा चौथ वाले दिन महिलाएँ सूरज निकलने से पहले सरगी खाती हैं और फिर पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को सोलह श्रृंगार करती हैं, चाँद निकलने का इंतज़ार करती हैं और चलनी से चाँद और पति का चेहरा देखकर अर्घ्य देती हैं। पति उन्हें जल पिलाकर व्रत खुलवाते हैं। ये पल पति पति के रिश्ते का साल में सबसे खास पल माना जाता है ।
करवा चौथ की शुरुआत कैसे करें?
व्रत रखने की विधि के अनुसार सुबह सबसे पहले अपनी सास से सरगी लेकर ग्रहण करनी होती है जो की एक तरह का भोजन होता है । उसे ग्रहण करने के बाद पूरा दिन निर्जला बरत रखना होता है । और पूजन के समय चाँद निकलने का इंतजार करने के बाद जब चाँद निकाल जाए तब पूजा में करवा, मिट्टी का दीपक, छलनी, फल, मिठाई और पानी का लोटा रखा जाता है। रात को चाँद को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूरा होता है।
चाँद को अर्घ्य देते समय क्या बोलते हैं?
ये सवाल बेहद आम और एक तरह से खास भी है की जब हम चाँद को अर्घ देते है उस समय क्या बोलना चाहिए । चाँद को अर्घ्य देते वक्त महिलाएँ प्रार्थना करती हैं
“सदा सुहागन रहूँ, मेरे पति दीर्घायु हों।”
यह मंत्र सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि हर स्त्री की श्रद्धा और प्रेम का प्रतीक है। आप भी इसका जाप करें ।
करवा चौथ का व्रत सबसे पहले किसने किया था?
प्राचीन काल में करवा चौथ का व्रत इसलिए रखा जाता था क्यूंकी जब महिलाओं के पति किसी युद्ध में भाग लेने या फिर किसी व्यापार के संबंध में घर से बाहर जाते थे तो उनकी सुरक्षा की कामना के लिए व्रत रखा जाता था लेकिन इस व्रत की खास मान्यता एक विरावती नाम की महिला से हुई जिसने व्रत रखा हुआ था लेकिन उसके पति की मृत्यु ही गई ।
मान्यता के अनुसार, सबसे पहले वीरावती ने ही यह व्रत किया था। उसकी कहानी ही आज की Karva Chauth Ki Kahani बन गई, जिसे हर महिला आज भी बड़े विश्वास और आस्था से निभाती है।














