हिमाचल प्रदेश का Kullu Dussehra न सिर्फ़ राज्य बल्कि पूरे देश और दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र होता है। भारत में जहां विजयदशमी रावण दहन के साथ समाप्त होती है, वहीं कुल्लू में दशहरा की शुरुआत होती है। यही इस पर्व को खास और अनोखा बनाता है। कुल्लू का दशहरा हिमाचल का एक बहुत प्रसिद्ध त्योहार है जो की कुल्लू मैं धूमधाम से मनाया जाता है कुल्लू दशहरा जिसे विजयदशमी के नाम से भी जाता है पहाड़ी लोग अपने ग्रामीण देवता का धूम धाम से जुलूस निकाल कर पूजन करते हें देवताओं की पालकी को बहुत अच्छे से सजाया जाता है जो की देखने मैं बहुत सुन्दर लगती है
स्थानीय लोग मानते हैं कि भगवान रघुनाथ जी के सम्मान में आयोजित यह उत्सव भक्ति, संस्कृति और एकता का प्रतीक है। इस बार भी कुल्लू दशहरा में देश-विदेश से लाखों पर्यटकों के आने की उम्मीद है।
कुल्लू दशहरा की ऐतिहासिक मान्यता
ऐसा कहा जाता है कि 17वीं शताब्दी में राजा जगत सिंह ने भगवान रघुनाथ जी की मूर्ति को कुल्लू लाकर इसे राज्य देवता घोषित किया। तब से हर साल Kullu Dussehra में रघुनाथ जी की रथ यात्रा पूरे उत्सव का मुख्य आकर्षण रहती है। ओर इस रथ को इस तरह से सजाया होता है की देखने मैं बहुत जड़ सुन्दर ओर आकर्षक लगता है
जैसा कि पहले Newstop ने रिपोर्ट किया था, इस रथयात्रा में सैकड़ों देवी-देवताओं की पालकियां शामिल होती हैं और यह दृश्य एक आध्यात्मिक संगम का अहसास कराता है।
अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है कुल्लू दशहरा
यूनिक तरीके से मनाए जाने के कारण इसे “International Mega Dussehra” का दर्जा मिला है। यहां न सिर्फ़ धार्मिक झलक देखने को मिलती है, बल्कि लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के कार्यक्रम भी इसकी शोभा बढ़ाते हैं। यहाँ के लोग इसे बहुत अच्छे से मनाते हें अपनी संस्कृतियों को ध्यान मैं रखते हुए इस पर्व को मनाया जाता है ये सब देखते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल चुकी है
कुल्लू दशहरा 2025 की ताज़ा तैयारियां
इस साल का उत्सव और भी खास होने जा रहा है। प्रशासन ने सुरक्षा और पर्यटक सुविधाओं पर जोर दिया है। शहर में यातायात व्यवस्था को नया स्वरूप दिया गया है और स्टेडियम में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है।
पर्यटकों के लिए हिमाचल पर्यटन विभाग ने होटल और गेस्ट हाउस बुकिंग पर ऑफर्स भी निकाले हैं।
Kullu Dussehra क्यों है अनोखा?
भारत में बाकी जगह दशहरा का समापन होता है, पर कुल्लू में यही से शुरुआत होती है।
रावण दहन यहां नहीं होता। इसके बजाय भगवान रघुनाथ की पूजा और रथ यात्रा मुख्य आकर्षण है।
लोक कलाकारों के नृत्य और देशी-विदेशी मेहमानों की मौजूदगी इसे अंतरराष्ट्रीय रंग देती है
Kullu Dussehra से पर्यटन को बढ़ावा
हर साल हजारों विदेशी पर्यटक यहां आते हैं। यह न सिर्फ़ हिमाचल की अर्थव्यवस्था को गति देता है बल्कि स्थानीय कारीगरों और दुकानदारों के लिए भी यह त्योहार खास महत्व रखता है
हिमाचल में Kullu Dussehra के दौरान एक तहसीलदार की पिटाई, कॉलर से पकड़कर रगड़ते हुए ले गई भीड़…अधिकारी ने हाथ जोड़कर मांगी माफी
हिमाचल के Kullu Dussehra मैं तहसीलदार की भीड़ ने पिटाई कर दी देवता भृगहू ऋषि के शिविर को लेकर विवाद के बाद यह घटना पेश आई जिला कुल्लू के ढालपुर मेदान मैं चल रहे दशहरा उत्सव के दोरान तहसीलदार कुल्लू हरी सिंह यादव ओर देवता भृगु ऋषि के देवलुओं के बीच झड़प हो गई ओर इसका विडिओ भी इंटरनेट पर बहुत वायरल हो रहा है
इंटरनेट मीडिया मैं वायरल विडिओ के आधार पर देवलु तहसीलदार को कुल्लू को खींचकर ले जाते हुए नजर आ रहे हें ओर देवता भृगु ऋषि के समक्ष भी तहसीलदार माफी मांगते हुए नजर आ रहे हें ऐसा माना जा रहा है की शाम को दोनों के बीच किसी बात को लेकेर बहस हुई थी जिसके चलते देव समाज के लोग नाराज थे ऐसे मैं आज दोपहर के समय जब तहसीलदार कुल्लू ढालपुर का निरीक्षण कर रहे थे तो काफी संख्या मैं लोग आए ओर उन्हें देवता के शिविर मैं ले गए इस दोरान तहसीलदार को देवता से माफी मांगने की बात कही














