Leh Ladakh Protests : क्यों भड़के छात्र? लद्दाख की सड़कों पर इस बार सिर्फ बुजुर्ग या कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि Gen Z की नई पीढ़ी भी उतर आई है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के लंबे समय से चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन को अब युवाओं ने तेज कर दिया है। लेह में बुधवार को हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और करीब 80 से अधिक लोग घायल हुए।
Is Ladakh Protest Over या अभी जारी है?
फिलहाल हालात पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक 40 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं और शहर के कई हिस्सों में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े और बड़ी संख्या में जवानों को तैनात किया गया है। स्थिति को सामान्य करने की कोशिशें लगातार जारी हैं। स्थिति बिगड़ने को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए sonam vangchuk ने 15 दिन बाद अनशन को समाप्त करने का ऐलान कर दिया ।
उन्होंने कहा की ये हमारा रास्ता नहीं है और न ही इस से कोई समाधान होने वाला है इस प्रकार के हिंसक प्रदर्शन से सिर्फ ladakh का नुकसान होगा । आगे उन्होंने युवाओं से भी अपील की है की हिंसा न करें । और प्रशासन से भी गुहार लगाई है की कार्यवाही को रोकें और स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश करें ।
Ladakh Latest Protest: उपराज्यपाल की चेतावनी
Ladakh के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि “लोकतंत्र में हर किसी को अपनी आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना और पथराव करना लद्दाख की परंपरा नहीं है।” उन्होंने साफ कर दिया कि जो लोग शांति भंग करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
Leh Ladakh Current Situation: दिल्ली में हो सकती है बैठक
सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर केंद्र सरकार 6 अक्टूबर को दिल्ली में बैठक कर सकती है। यह बैठक इसलिए अहम है क्योंकि अनुच्छेद 370 और 35A हटने के बाद 2019 में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था और उस वक्त सरकार ने पूर्ण राज्य का दर्जा देने का आश्वासन भी दिया था। लेकिन समय के साथ ये मांग उठाई जाने लगी की आखिर ये पूर्ण राज्य की मांग कब पूरी होगी । और इसी के चलते शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहे जो अब हिंसक रूप में बदल गए हैं ।
Protest in Ladakh UPSC: प्रदर्शनकारियों की बड़ी मांगें
Ladakh में प्रदर्शन तो काफी लंबे समय से चल रहे हैं। लेकिन sonam vangchuk की अगुवाई में प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था । प्रदर्शनकारी चार मुख्य मांगों को लेकर सड़कों पर हैं:
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले।
छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा।
कारगिल और लेह के लिए अलग-अलग लोकसभा सीटें।
सरकारी नौकरियों में स्थानीय लोगों की भर्ती।
युवाओं का कहना है कि बिना इन मांगों के उनके भविष्य की गारंटी अधूरी है जो सरकार ने वादा किया था 370 हटाने के बाद वो अभी तक पूरा नहीं हो रहा है । इसलिए लोगों में काफी नाराजगी है ।
Why is Ladakh Protesting? ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जैसा कि पहले Newstop ने रिपोर्ट किया था, अनुच्छेद 370 हटने के बाद लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला। लेकिन कई स्थानीय संगठन और कार्यकर्ता मानते हैं कि यह दर्जा उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उनका तर्क है कि छठी अनुसूची के तहत उन्हें संविधानिक सुरक्षा मिलनी चाहिए ताकि उनकी ज़मीन, संस्कृति और रोजगार सुरक्षित रह सके। जिसके लिए वो लोग लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं ।
Ladakh Autonomy Protest: क्या मिलेगा राज्य का दर्जा?
लद्दाख में लगातार बढ़ते विरोध और अब हिंसा में बदलते माहौल ने केंद्र सरकार के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। सवाल यह है कि क्या सरकार आंदोलनकारियों की मांगें मान लेगी और लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देगी या फिर आंदोलन और लंबा खिंचेगा। लेकिन प्रदर्शन के मुख्य चेहरा sonam vangchuk है और वो एक शांतिप्रिय व्यक्तित्व है । और उन्होंने बढ़ती हिंसा को देखते हुए अपना अनशन समाप्त कर दिया है । और साथ ही हिंसा का विरोध किया है ।
Kargil Protest और बढ़ते दबाव
सिर्फ लेह ही नहीं, कारगिल में भी प्रदर्शनकारियों की आवाज़ बुलंद हो रही है। दोनों ज़िलों के संगठन एकजुट होकर आंदोलन को और व्यापक बनाने की तैयारी में हैं। अगर यह विरोध और बढ़ता है तो आने वाले दिनों में इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
लद्दाख का यह आंदोलन अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रहा। यह सवाल बन गया है कि केंद्र सरकार अपनी ही दी हुई गारंटी को कब और कैसे पूरा करेगी। अगले कुछ दिनों में होने वाली बैठकें इस दिशा में अहम साबित होंगी।














