नेपाल में पिछले कुछ दिनों से हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। Nepal Protests Gen Z ने राजधानी काठमांडू को हिंसा, आगजनी और अफरातफरी के माहौल में झोंक दिया है। शुरुआत तो सरकार द्वारा Facebook, X और YouTube जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाने से हुई, लेकिन धीरे-धीरे यह गुस्सा एक बड़े राजनीतिक विद्रोह में बदल गया।
जैसा कि पहले Newstop ने रिपोर्ट किया था, नेपाल की युवा पीढ़ी लंबे समय से unemployment और भ्रष्टाचार को लेकर नाराज़ थी। सोशल मीडिया बैन ने आग में घी का काम किया।
नेताओं पर हमले और हिंसा की चपेट में राजधानी
इन Nepal Protests Gen Z ने सिर्फ नारेबाजी तक खुद को सीमित नहीं रखा। राजधानी में कई सरकारी इमारतों और नेताओं के घरों को आग के हवाले कर दिया गया। इसमें की पुरानी धरोहर इमारतें भी शामिल हैं ।
पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी अर्चना राणा देउबा पर भीड़ ने हमला किया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियोज़ में उन्हें चोटिल हालत में भागते देखा गया।
पूर्व पीएम झाला नाथ खनाल के घर में आग लगा दी गई, जिसमें उनकी पत्नी राजलक्ष्मी चित्रकार की मौत हो गई।
मौजूदा हालात में 19 लोगों की मौत और दर्जनों घायल होने की पुष्टि हुई है।
केपी शर्मा ओली का इस्तीफा और अनिश्चित भविष्य
लगातार बढ़ते दबाव और हिंसा के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया। हालांकि राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उन्हें caretaker PM के तौर पर काम जारी रखने को कहा है, लेकिन सवाल यह है कि अब सत्ता किसके हाथ में जाएगी। और कबतक ये हिंसक और उग्र भीड़ पर काबू पाया जाएगा ।
दिलचस्प बात यह है कि इस्तीफे से ठीक पहले प्रदर्शनकारियों ने ओली के निजी घर में आगजनी कर दी थी। यही वजह है कि अब नेपाल की राजनीति और भी अस्थिर दिखाई दे रही है।
क्यों खास हैं Gen Z Protests?
Nepal Protests Gen Z महज़ सोशल मीडिया बैन के खिलाफ नहीं है। युवाओं का गुस्सा इस बात पर भी है कि नेताओं के बच्चे यानी “nepo kids” आलीशान जिंदगी जी रहे हैं, जबकि आम युवा बेरोजगारी से जूझ रहा है।
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट बताती है कि नेपाल में युवा बेरोजगारी दर करीब 20% है और रोज़ाना 2,000 से ज्यादा युवा विदेश नौकरी की तलाश में जाते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया बैन ने युवाओं की आवाज़ को दबाने का प्रतीक बनकर विद्रोह को जन्म दिया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और खतरा
यह Nepal Protests Gen Z अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में है।
के मुताबिक, हालात इतने बिगड़े कि पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने peaceful dialogue की अपील की है।अगर हिंसा पर काबू नहीं पाया गया तो नेपाल के लिए यह राजनीतिक और आर्थिक संकट में बदल सकता है। जिस से देश को और नेपाल के नागरिकों को ही नुकसान उठाना पद सकता है ।
Nepal Protests Gen Z के बाद आगे का रास्ता
नेपाल की सड़कों पर फिलहाल गुस्सा और निराशा का आलम है। Nepal Protests Gen Z ने साफ कर दिया है कि अब युवा सिर्फ वोट बैंक नहीं बल्कि सत्ता परिवर्तन की ताकत भी हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नेपाल की सरकार इन मांगों को सुनती है या हालात और बिगड़ते हैं। हालांकि अब सरकार के रहने का कोई भी रास्ता नहीं रह गया है सभी नेताओं ने एक एक कर इस्तीफे दे दिए हैं ।














