मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में हुए एक मिसाइल हमले ने पूरे मध्य पूर्व की राजनीति को हिला दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक़, यह Israel attack Qatar सीधे उन हमास नेताओं को निशाना बनाकर किया गया था जो अमेरिकी सीज़फ़ायर प्रपोज़ल पर चर्चा करने के लिए इकट्ठा हुए थे।
हमले में कम से कम छह लोगों की मौत हुई, जिनमें हमास नेता खलील अल-हय्या के बेटे और तीन बॉडीगार्ड भी शामिल बताए जा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंज
यह हमला उस वक्त हुआ जब कतर, जो अमेरिका का करीबी सहयोगी और अरब दुनिया में एक अहम मध्यस्थ है, शांति वार्ता की मेज़बानी कर रहा था।
जैसा कि पहले Newstop ने रिपोर्ट किया था, गाज़ा युद्ध को लेकर कतर लगातार अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। लेकिन Israel attack Qatar ने इन कोशिशों को गहरी चोट पहुंचाई है।
मिडल ईस्ट के कई देशों के साथ-साथ यूरोप और एशिया से भी इस हमले की आलोचना हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल शांति वार्ता पटरी से उतर सकती है, बल्कि कूटनीतिक संकट भी गहराएगा।
निशाने पर था दोहा का डिप्लोमैटिक ज़ोन
हमले में जिस बिल्डिंग को टारगेट किया गया, वह दोहा के उस इलाके में स्थित है जहां कई विदेशी एंबेसीज़ और स्कूल हैं।
गवाहों ने बताया कि बिल्डिंग का एक हिस्सा पूरी तरह ढह गया, जबकि आसपास की इमारतों को मामूली नुकसान हुआ। यह संकेत देता है कि इज़राइल ने precision-guided weapons का इस्तेमाल किया, जिससे केवल निशाने वाली जगह पर असर हुआ।
क़तर की प्रतिक्रिया और अमेरिकी भूमिका
कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने बयान दिया कि “इज़राइल ने ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया जो रडार पर डिटेक्ट नहीं हुए।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने हमले की जानकारी समय रहते साझा नहीं की। क़तर का कहना है कि उन्हें चेतावनी हमले के लगभग 10 मिनट बाद मिली।
यहां गौर करने वाली बात यह है कि कतर में अमेरिकी सेंट्रल कमांड का मुख्यालय अल-उदीद एयरबेस पर मौजूद है, जहां से पूरे मिडल ईस्ट की मॉनिटरिंग होती है। इसके बावजूद इस हमले को रोका नहीं जा सका।
हमास की स्थिति और असमंजस
हमास ने दावा किया है कि उसके शीर्ष नेता इस हमले से बच गए, लेकिन अभी तक इसके ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर वास्तव में खलील अल-हय्या जैसे नेता इस हमले में मारे जाते, तो यह गाज़ा संघर्ष की दिशा ही बदल देता। फिलहाल, मरने वालों में उनके बेटे और करीबी सहयोगी शामिल बताए जा रहे हैं।
रिपोर्टर की नज़र से
मेरे हिसाब से यह हमला सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि एक डिप्लोमैटिक मैसेज है। दोहा जैसे सुरक्षित और रणनीतिक शहर में Israel attack Qatar होना दिखाता है कि अब जंग केवल गाज़ा तक सीमित नहीं है।
इससे शांति वार्ता की संभावनाएं कमजोर हो गई हैं और आने वाले दिनों में मिडल ईस्ट का तनाव और भड़क सकता है । और साथ ही अमेरिका के लिए भी एक निराशाजनक स्थिति पैदा हो गई है । क्योंकि अमेरिका इस मध्यस्थता के जरिए हमास और इजरायल के बीच शांति वार्ता करवाने के पक्ष में था । अब उस पर प्रशन चिन्ह लग गया है । और अमेरिका की डिप्लोमेसी पर भी सवाल जरूर उठेंगे । क्योंकि अमेरिका समय रहते हमले का आंकलन नहीं कर पाया ।














